दो बातों को बहुत सावधानी से सदा और एक साथ ध्यान में रखना है कि भगवान का सदा सर्वत्र स्मरण हो और एक क्षण का उधार न हो । अगला क्षण मिले न मिले । अगर हम मनुष्य देह की क्षणभंगुरता पर सदा ध्यान केन्द्रित रखें तो लापरवाही नहीं करेंगे । सावधान रहेंगे ।
----- श्री महाराजजी ।
राधे - राधे ।
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